भारत में ग्रीष्म ऋतु के त्यौहार 2026: तारीखें, स्थान और खास बातें
भारत में ग्रीष्म ऋतु, यानी मार्च से जून तक का समय, मौसम के बदलाव और धूप के तेज होने का प्रतीक होता है। इस समय देश में न सिर्फ गर्मी बढ़ती है, बल्कि यह त्योहारों और उत्सवों का भी मौसम होता है। भारतीय संस्कृति में त्योहारों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। ये केवल धार्मिक या पारंपरिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि समाज में भाईचारे, खुशियाँ और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने का माध्यम भी हैं। इस ब्लॉग में हम भारत में ग्रीष्म ऋतु में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों, उनकी परंपराओं और उत्सवों के तरीकों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
2026 में भारत के 12 बेहतरीन समर फेस्टिवल
आगे पढ़ने से पहले, यहाँ भारत में होने वाले समर फेस्टिवल्स की एक लिस्ट दी गई है, जिनके 2026 के लिए तय किए गए तारीखें शामिल हैं। तो तैयार हो जाइए एक शानदार, मज़ेदार और यादगार छुट्टियों के अनुभव के लिए!
भारत के प्रमुख समर फेस्टिवल्स और उनकी तारीखें:
- गंगौर उत्सव – 5 मार्च 2025 से 31 मार्च 2025
- बैसाखी – 13 अप्रैल 2025
- चिथिरई फेस्टिवल – 14 अप्रैल 2025
- मोत्सु फेस्टिवल – 1 मई 2025 से 3 मई 2025
- माउंट आबू समर फेस्टिवल – 10 मई 2025 से 12 मई 2025
- ऊटी फ्लावर फेस्टिवल – 17 मई 2025 से 22 मई 2025
- यरकौड समर फेस्टिवल – 21 मई 2025 से 26 मई 2025
- शिमला समर फेस्टिवल – मई / जून 2025
- सिक्किम समर फेस्टिवल – 26 मई 2025
- हेमिस फेस्टिवल – 5 जुलाई 2025 से 6 जुलाई 2025
- कोल्लम पूरम – 15 अप्रैल 2025
- पहेला बैसाख – 15 अप्रैल 2025
1.गंगौर

गंगौर 2026 में 21 मार्च को मनाया जाएगा। यह त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के ग्रामीण इलाकों में बहुत धूम‑धाम से होता है। खासकर सुहागिन महिलाएँ देवी गौरी और भगवान शिव की पूजा करती हैं और रात को पारंपरिक गीत‑भजन गाती हैं। इसके दौरान सजे‑धजे(procession) गौओं के साथ पानी और फूल चढ़ाए जाते हैं और शुभकामनाएँ दी जाती हैं।
2.बैसाखी

बैसाखी 2026 में 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह त्योहार खासकर पंजाब और उत्तर भारत में किसान समुदाय के लिए बहुत अहम है। बैसाखी ऋतु में फसल कटाई का समय होता है, इसलिए यह किसानों के लिए खुशी और आभार व्यक्त करने का अवसर बनता है। लोग पारंपरिक परिधान पहनकर भांगड़ा‑गिद्दा करते हैं और लंगर व प्रसाद वितरित करते हैं।
3.चिथिराई फेस्टिवल

चिथिराई महोत्सव 2026 में 14 अप्रैल के आसपास तमिलनाडु में मनाया जाता है (तिथि पंचांग के हिसाब से बदल सकती है)। यह मदुरै के मंदिरों में विशेष रूप से प्रसिद्ध है और इसमें भगवान मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर के विवाह उत्सव को दर्शाया जाता है। लोग बड़े उत्साह से रथ यात्राएँ, पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं।
4.मोअत्सु फेस्टिवल
मोअत्सु त्योहार 2026 में 1 से 3 मई के बीच नागालैंड और उत्तर‑पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। यह त्योहार स्थानीय लोगों की पारंपरिक संस्कृति, संगीत और नृत्य को प्रमुखता देता है। लोग एक साथ मिलकर लोकगीत गाते हैं, पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेते हैं और सामुदायिक मेलों में हिस्सा लेते हैं।
5.माउंट आबू समर फेस्टिवल

यह कार्यक्रम 2026 में 10 से 12 मई के बीच राजस्थान के माउंट आबू में आयोजित होता है। यह पर्व पहाड़ों की ठंडी वादियों, लोक नृत्यों, संगीत और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के लिए जाना जाता है। पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थानीय कला‑कला कौशल का आनंद लेने आते हैं।
6.ऊटी फ्लावर फेस्टिवल

ऊटी में यह त्योहार 2026 में 17 से 22 मई तक मनाया जाएगा। यहाँ के खूबसूरत फूलों और बाग़ानों को दर्शाने के लिए फूलों की सुंदर झांकियाँ, बगीचों की सजावट और रंगीन प्रदर्शन होते हैं। पर्यटक और स्थानीय लोग फूलों की सुगंध और प्राकृतिक दृश्यावलियों का आनंद लेते हैं।
7.येरकौड समर फेस्टिवल

येरकौड का यह महोत्सव 2026 में 21 से 26 मई तक होगा। यह पर्व खास तौर पर स्थानीय संस्कृति, पर्यटन स्थलों और पहाड़ी स्थानों की प्राकृतिक सुंदरता को प्रमोट करने के लिए आयोजित किया जाता है। इसमें परेड, संगीत, खेल और स्थानीय कला‑कार्यशालाएँ शामिल होती हैं।
8.शिमला समर फेस्टिवल

शिमला समर फेस्टिवल मई और जून के बीच आयोजित होता है (विशिष्ट तिथि राज्य सरकार द्वारा तय होती है)। इस समय पर्वतीय शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य‑गायन, खेलकूद और पर्यटन आकर्षणों की गतिविधियाँ भरपूर होती हैं। लोग ठंडी हवा और मनोरंजन का आनंद लेने आते हैं।
9.सिक्किम समर फेस्टिवल

यह उत्सव 2026 में 26 मई को मनाया जाता है (तिथि स्थानीय कैलेंडर के अनुसार बदल सकती है)। यह पर्व सिक्किम की सुंदर घाटियों, फूलों और पर्वतीय संस्कृति का जश्न है। इसमें साहसिक खेल, लोक संगीत और नृत्य के साथ पर्यावरण‑ प्रेम को भी बढ़ावा दिया जाता है।
10. हेमिस फेस्टिवल

हेमिस का प्रसिद्ध मेला 5 से 6 जुलाई 2026 को लेह‑लद्दाख के हेमिस मठ में मनाया जाता है। यह बौद्ध संस्कृति का एक महत्वपूर्ण उत्सव है जिसमें रंगीन masked नृत्य, पूजा‑अनुष्ठान और धार्मिक परेड होती हैं। यह पर्व बुद्धिस्ट कला और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।
11. कोल्लम पूरम

कोल्लम पूरम 2026 में 15 अप्रैल के आसपास केरल के कोल्लम में मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से मंदिर उत्सवों, हाथी प्रदर्शन, पारंपरिक संगीत और स्थानीय प्रतियोगिताओं के लिए प्रसिद्ध है। लोग त्योहार के दौरान झांकियों और दहल कलाकारों का आनंद लेते हैं।
12.पहेला बैशाख

पहेला बैशाख 15 अप्रैल 2026 को बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पारंपरिक नृत्यों, गीतों और लोक उत्सवों के माध्यम से नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। लोगों के बीच शुभकामनाएँ, पारंपरिक व्यंजन और मेल‑मिलाप की परंपरा होती है।
भारत में ग्रीष्म ऋतु के त्योहारों का महत्व
भारत में ग्रीष्म ऋतु के त्योहार वे उत्सव हैं, जो गर्मियों के मौसम में मनाए जाते हैं और जिनका हमारी जीवनशैली और संस्कृति से गहरा संबंध है। ये त्योहार न केवल मनोरंजन और खुशी का माध्यम होते हैं, बल्कि लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम भी करते हैं। भारत की विविधता इन त्योहारों में साफ दिखाई देती है, क्योंकि हर राज्य और क्षेत्र में इन्हें अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कई ग्रीष्म त्योहार कृषि से जुड़े होते हैं, जो फसल और प्रकृति के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हैं, जबकि कुछ त्योहार पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित होते हैं। ये उत्सव मौसम के बदलाव और प्रकृति के साथ हमारे गहरे जुड़ाव को भी दर्शाते हैं।
भारत में ग्रीष्म ऋतु के प्रमुख त्योहार
भारत में ग्रीष्म ऋतु के दौरान कई ऐसे त्योहार मनाए जाते हैं जो देश की संस्कृति, आस्था और परंपराओं को दर्शाते हैं। गर्मियों के मौसम में होने वाले ये उत्सव लोगों के जीवन में खुशी और रंग भर देते हैं। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाए जाने वाले ये त्योहार भारत की विविधता को खूबसूरती से दिखाते हैं। इन त्योहारों में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेल-जोल, संगीत, नृत्य और पारंपरिक खान-पान भी शामिल होता है। आइए अब भारत के कुछ प्रमुख ग्रीष्म त्योहारों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
भारत में ग्रीष्म त्योहारों का सांस्कृतिक महत्व
ग्रीष्म ऋतु के त्योहार भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये त्योहार लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं और समाज में प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। त्योहारों के समय परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी मिलकर पूजा-पाठ, गीत-संगीत और उत्सव मनाते हैं, जिससे आपसी संबंध गहरे होते हैं। कई ग्रीष्म त्योहारों का सीधा संबंध कृषि और ऋतुओं के बदलाव से होता है, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देते हैं। इसके साथ ही, इन त्योहारों में धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाएँ भी जुड़ी होती हैं, जो मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं। ऐसे उत्सव सामूहिक भागीदारी और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देते हैं।
ग्रीष्म त्योहारों का अनुभव करने के आसान टिप्स
भारत में ग्रीष्म ऋतु के त्योहारों का अनुभव करने के लिए सही समय पर यात्रा करना बहुत महत्वपूर्ण है। इन उत्सवों का आनंद लेने के लिए स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करना आवश्यक है, जैसे पूजा में भाग लेना या रंगों के खेल में सावधानी रखना। गर्मी के मौसम में होने वाले ये त्योहार लंबे समय तक बाहर रहते हैं, इसलिए अपनी सुरक्षा और आराम का ध्यान रखें। पर्याप्त पानी पीएँ, हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें और धूप से बचाव के लिए छाता, टोपी या सनस्क्रीन का उपयोग करें। इन सरल उपायों से आप त्योहारों का पूरा आनंद सुरक्षित और मज़ेदार तरीके से ले सकते हैं।
निष्कर्ष
भारत में ग्रीष्म ऋतु के त्योहार न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि ये समाज में भाईचारे, खुशियाँ और एकता भी बढ़ाते हैं। होली, रथ यात्रा, गंगा दशहरा, बैसाखी, गंगौर और अन्य क्षेत्रीय उत्सव लोगों को प्रकृति, कृषि और आध्यात्मिकता के करीब लाते हैं। भारत की यात्रा के दौरान इन त्योहारों में भाग लेना न सिर्फ आनंददायक होता है, बल्कि देश की विविधता और परंपराओं को समझने का भी अवसर देता है। परिवार और समुदाय के साथ मिलकर इन रंगीन और जीवंत उत्सवों का अनुभव करना आपकी यात्रा को और यादगार बनाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में ग्रीष्म ऋतु के प्रमुख त्योहार कौन‑कौन से हैं?
भारत में ग्रीष्म ऋतु के प्रमुख त्योहारों में होली, रथ यात्रा, गंगा दशहरा, गंगौर, बैसाखी, चिथिराई फेस्टिवल, मोअत्सु फेस्टिवल, माउंट आबू समर फेस्टिवल, ऊटी फ्लावर फेस्टिवल, येरकौड समर फेस्टिवल, शिमला समर फेस्टिवल, सिक्किम समर फेस्टिवल, हेमिस फेस्टिवल, कोल्लम पूरम और पहेला बैशाख शामिल हैं।
ग्रीष्म ऋतु के ये त्योहार किस समय मनाए जाते हैं?
ये त्योहार मार्च से जुलाई के बीच मनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, गंगौर मार्च में, बैसाखी और चिथिराई अप्रैल में, मोअत्सु मई की शुरुआत में, माउंट आबू समर फेस्टिवल और ऊटी फ्लावर फेस्टिवल मई में, हेमिस फेस्टिवल जुलाई में मनाया जाता है।
ग्रीष्म त्योहारों का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
ये त्योहार लोगों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं, समाज में भाईचारे और प्रेम को बढ़ावा देते हैं। कई त्योहार कृषि और मौसम से जुड़े हैं, कुछ धार्मिक और पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं। ये उत्सव हमारी संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक ऋतुओं के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं।
ग्रीष्म ऋतु के त्योहारों में भाग लेने के लिए कौन‑सी सावधानियाँ जरूरी हैं?
गर्मी में बाहर होने के कारण पर्याप्त पानी पीना, हल्के और आरामदायक कपड़े पहनना, धूप से बचने के लिए टोपी, छाता या सनस्क्रीन का उपयोग करना और स्थानीय रीति‑रिवाजों का सम्मान करना जरूरी है।
भारत की यात्रा के दौरान ग्रीष्म त्योहारों में कैसे भाग लिया जा सकता है?
भारत की यात्रा के दौरान आप स्थानीय उत्सवों और मेले में भाग लेकर, लोक नृत्य, संगीत और पारंपरिक व्यंजन का आनंद लेकर त्योहारों का अनुभव कर सकते हैं। परिवार और समुदाय के साथ मिलकर इन रंगीन और जीवंत उत्सवों का अनुभव आपकी यात्रा को और यादगार बना देता है।
ग्रीष्म ऋतु के त्योहारों को देखने का सबसे अच्छा समय कब है?
मार्च से जून तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान अधिकांश ग्रीष्म त्योहार मनाए जाते हैं और मौसम यात्रा के लिए अनुकूल होता है।

As a seasoned Hindi translator, I unveil the vibrant tapestry of cultures and landscapes through crisp translations. Let my words be your passport to exploration, igniting a passion for discovery and connection. Experience the world anew through the beauty of language.











