जम्मू और कश्मीर के 10 प्रसिद्ध त्यौहार जो आपकी यात्रा को खास बना देंगे

जम्मू और कश्मीर के 10 प्रसिद्ध त्यौहार जो आपकी यात्रा को खास बना देंगे
Updated Date: 13 February 2026

जम्मू और कश्मीर सिर्फ अपनी खूबसूरत वादियों और बर्फीले पहाड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जीवंत संस्कृति और रंगीन त्योहारों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग रहते हैं, जिनकी झलक उनके त्योहारों में साफ दिखाई देती है। जब आप किसी त्योहार के समय जम्मू और कश्मीर की यात्रा करते हैं, तो सिर्फ जगहें नहीं देखते, बल्कि वहाँ के लोगों की सोच, परंपराएँ और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को भी करीब से महसूस करते हैं। मस्जिदों में रौनक, मंदिरों की आरतियाँ, मठों में होने वाले नृत्य और स्थानीय बाजारों की चहल-पहल यात्रा को खास बना देती है। इस ब्लॉग में हम जम्मू और कश्मीर के 10 प्रसिद्ध त्योहारों के बारे में जानेंगे, जो आपकी यात्रा को यादगार अनुभव में बदल सकते हैं।


Table Of Content

जम्मू और कश्मीर में त्योहारों का महत्व

जम्मू और कश्मीर में त्योहारों का महत्व

जम्मू और कश्मीर के त्योहार यहाँ की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। इस क्षेत्र में हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और सिख समुदाय लंबे समय से साथ रहते आए हैं और उनके त्योहार इस आपसी मेल-जोल को साफ दिखाते हैं। हर पर्व के साथ जुड़ी परंपराएँ, लोक संगीत और पारंपरिक नृत्य लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा होते हैं। त्योहारों के समय गाँवों और शहरों में खास रौनक देखने को मिलती है, जहाँ स्थानीय रीति-रिवाज और खान-पान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन उत्सवों के ज़रिए यात्री जम्मू और कश्मीर की संस्कृति को केवल देख नहीं, बल्कि महसूस भी कर पाते हैं।

1. गालदान नामचोट (Galdan Namchot) – 03 दिसंबर

गालदान नामचोट

गालदान नामचोट लद्दाख में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण बौद्ध त्योहार है, जो तिब्बती नववर्ष की शुरुआत का संकेत देता है। इस दिन मठों और घरों में दीप जलाए जाते हैं और विशेष प्रार्थनाएँ की जाती हैं। ठंडी सर्दियों के बीच यह त्योहार लद्दाख की आध्यात्मिक और शांत संस्कृति को करीब से समझने का मौका देता है। सर्दियों में यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए यह एक अलग और यादगार अनुभव होता है।

2. स्पितुक गुस्टर ज़ांस्कर (Spituk Gustor) – 16–17 जनवरी

स्पितुक गुस्टर ज़ांस्कर

यह त्योहार स्पितुक मठ में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसमें बौद्ध भिक्षु रंग-बिरंगे मुखौटे पहनकर पारंपरिक नृत्य करते हैं। यह उत्सव बुरी शक्तियों पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। फोटोग्राफी और संस्कृति में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए यह खास आकर्षण है।

3. हेमिस फेस्टिवल (Hemis Festival) – 24–25 जून

हेमिस फेस्टिवल

हेमिस फेस्टिवल लद्दाख का सबसे प्रसिद्ध और भव्य त्योहार माना जाता है। यह हेमिस मठ में गुरु पद्मसंभव के जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है। पारंपरिक मुखौटा नृत्य, ढोल-नगाड़े और धार्मिक अनुष्ठान इस त्योहार को खास बनाते हैं। जुलाई का मौसम यात्रा के लिए अनुकूल होता है, इसलिए यह समय लद्दाख घूमने के लिए बेहद लोकप्रिय होता है।

4. ट्यूलिप फेस्टिवल (Tulip Festival) – 25 मार्च से 15 अप्रैल

ट्यूलिप फेस्टिवल

 

श्रीनगर में आयोजित ट्यूलिप फेस्टिवल वसंत ऋतु का स्वागत करता है। इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में रंग-बिरंगे फूल घाटी की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यह समय कश्मीर घूमने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है।

5. लोसार (Losar) – 18 फरवरी

लोसार

लोसार लद्दाखी और तिब्बती समुदाय का नववर्ष होता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं और मठों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पर्यटकों को इस दौरान स्थानीय जीवनशैली, खान-पान और रीति-रिवाजों को करीब से देखने का मौका मिलता है।

6. सिंधु दर्शन उत्सव (Sindhu Darshan Festival) – 12–14 जून

सिंधु दर्शन उत्सव

सिंधु दर्शन उत्सव सिंधु नदी के सम्मान में मनाया जाता है और यह राष्ट्रीय एकता व सांस्कृतिक मेल-जोल का प्रतीक है। इस दौरान प्रार्थनाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और समारोह आयोजित किए जाते हैं। जून का मौसम यात्रा के लिए उपयुक्त होता है, जिससे यह उत्सव पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय रहता है।

7. अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) – 03 जुलाई से 09 अगस्त

अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह यात्रा कठिन जरूर है, लेकिन आस्था और श्रद्धा से भरी हुई होती है। ऊँचे पहाड़ों और बर्फीले रास्तों के बीच यह यात्रा आध्यात्मिक के साथ-साथ साहसिक अनुभव भी प्रदान करती है।

8. लद्दाख फेस्टिवल (Ladakh Festival) – 21 से 24 सितंबर

लद्दाख फेस्टिवल

लद्दाख फेस्टिवल इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। इसमें पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत, रंगीन परिधान और स्थानीय खेलों का आयोजन होता है। सितंबर का मौसम साफ और सुहावना होता है, जिससे यह समय लद्दाख घूमने के लिए आदर्श माना जाता है।

9. माथो नगरंग (Matho Nagrang) – 2–3 मार्च

माथो नगरंग

माथो मठ में मनाया जाने वाला यह त्योहार भविष्यवाणियों और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। इसमें बौद्ध भिक्षु विशेष साधना करते हैं। यह उत्सव पर्यटकों के लिए काफी रोचक और रहस्यमय अनुभव देता है।

10. दोसमोचे (Dosmoche) – 15–16 फरवरी

दोसमोचे

दोस्मोचे त्योहार लेह और लिकिर मठ में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नकारात्मक शक्तियों को दूर करना होता है। पारंपरिक नृत्य और धार्मिक रस्में इस उत्सव का मुख्य आकर्षण हैं।

त्योहारों के दौरान जम्मू और कश्मीर घूमने के टिप्स

  • जिस त्योहार का अनुभव लेना चाहते हैं, उसी के अनुसार अपनी ट्रिप प्लान करें। त्योहारों के समय माहौल ज्यादा जीवंत और खास होता है।
  • फेस्टिवल सीज़न में पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है, इसलिए होटल, टैक्सी और फ्लाइट की booking पहले कर लेना बेहतर रहता है।
  • पहाड़ी इलाकों में मौसम जल्दी बदल सकता है। गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयाँ और मौसम से जुड़ी जानकारी पहले से रखें।
  • मंदिर, मस्जिद या मठ जाते समय पहनावे और नियमों का ध्यान रखें और स्थानीय लोगों की परंपराओं का सम्मान करें।

निष्कर्ष

जम्मू और कश्मीर के त्योहार इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता, धार्मिक आस्था और पारंपरिक जीवनशैली को खूबसूरती से दर्शाते हैं। लद्दाख के बौद्ध उत्सवों से लेकर कश्मीर की रंगीन वसंत ऋतु और पवित्र धार्मिक यात्राओं तक, हर त्योहार एक अलग अनुभव देता है। जब कोई यात्री जम्मू कश्मीर की यात्रा त्योहारों के समय करता है, तो उसे केवल प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की परंपराएँ, संगीत और रीति-रिवाज भी करीब से देखने को मिलते हैं। ऐसे अनुभव किसी भी ट्रिप को यादगार और खास बना देते हैं।
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Image Sources: Wikimedia Commons, Facebook, and Pexels.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जम्मू और कश्मीर में कौन-कौन से प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं?

जम्मू और कश्मीर में गालदान नामचोट, हेमिस फेस्टिवल, ट्यूलिप फेस्टिवल, लोसार, सिंधु दर्शन उत्सव, अमरनाथ यात्रा, लद्दाख फेस्टिवल और दोसमोचे जैसे कई प्रसिद्ध त्योहार मनाए जाते हैं, जो यहाँ की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।

जम्मू और कश्मीर घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

अप्रैल से सितंबर का समय जम्मू और कश्मीर घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान ट्यूलिप फेस्टिवल, हेमिस फेस्टिवल और लद्दाख फेस्टिवल जैसे कई बड़े उत्सव भी होते हैं।

क्या त्योहारों के समय जम्मू और कश्मीर घूमना सुरक्षित है?

हाँ, त्योहारों के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं। फिर भी यात्रियों को स्थानीय प्रशासन की सलाह माननी चाहिए और मौसम से जुड़ी जानकारी पहले से लेनी चाहिए।

क्या पर्यटक इन त्योहारों में शामिल हो सकते हैं?

ज्यादातर त्योहार पर्यटकों के लिए खुले होते हैं। पर्यटक इन उत्सवों के दौरान स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत और खान-पान का अनुभव कर सकते हैं।

जम्मू और कश्मीर के त्योहार किस धर्म से जुड़े होते हैं?

यहाँ के त्योहार हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और सिख धर्म से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि जम्मू और कश्मीर की संस्कृति में सभी धर्मों की झलक देखने को मिलती है।

Category: Events And Festivals, hindi, Jammu, Kashmir

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